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क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी ||

चूमना पड़ता है फांसी का फंदा, चरखा चलाने से इंकलाब नहीं आता। जाने कितने झूले थे फाँसी पर, कितनो ने गोली खाई थी | क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी || चरखा हरदम खामोश रहा, और अंत देश को बांट दिया | लाखों बेघर,लाखो मर गए, जब गाँधी ने बंदरबाँट किया || जिन्ना के हिस्से…