Border Roads Organisation (सीमा सड़क संगठन)

सीमा सड़क संगठन(BRO) की स्थापना भारत के पहले पं पंडित जवाहरलाल नेहरू की नेतृत्व में 7 मई 1960 में की गयी थी| इस आर्गेनाईजेशन को बनाने का जो प्रमुख उद्देश्य था वो ये था की आज़ादी के बाद जो भारत की सीमाएं और जो भारत की सुदूरवर्ती इलाके है जहां पर संसाधन आसानी से नहीं पहोच सकते हे ऐसे जगाओ पर आसानी से पहोच के इन इलाको को सुरक्षित रख सके| सीमा सड़क संगठन (BRO) रक्षा मंत्र्यालय के अंतर्गत सड़क निर्माण करने वाली एक प्रमुख संगठन है| इसका मुख्य काम केवल भारत की सीमा सेंटरो तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारत के मित्र देशों में भी रोड नेटवर्क को भी डेवेलोप और मेन्टेन करने का काम करती है| बॉर्डर रोड्स इंजीनियरिंग सर्विस (BRES) के अधिकारी और जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) के कर्मी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पेरेंट कैडर बनाते हैं। यह भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स के अतिरिक्त रेजिमेंटल रोजगार (प्रतिनियुक्ति पर) से निकाले गए अधिकारियों और सैनिकों द्वारा भी किया जाता है। इस आर्गेनाईजेशन में पर्सन को इसके पैरेंट केडेट बीआरईएस यानि की बॉर्डर रोड इंजीनियरिंग सर्विसेज और जी आर ई एफ जनरल रिज़र्व इंजीनियरिंग बल से लिया जाता है| जो इसमें अफसर का सिलेक्शन होता हे वो संघ लोक सेवा आयोग के इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज यानि की इस एग्जामिनेशन के माध्यम से लिया जाता है|

 वर्तमान में, संगठन इक्कीस राज्यों, एक केन्द्र शासित प्रदेश (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) और अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में परिचालन बनाए रखता है। बीआरओ देश में 32,885 किलोमीटर सड़कों और लगभग 12,200 मीटर स्थायी पुलों का संचालन और रखरखाव करता है।

इसका मोट्टो हे ‘श्रमणा सर्वं साध्यम’ जिसका मतलब हुआ की आप कड़ी मेहनत से किसी भी चीज को प्राप्त कर सकते है| बीआरओ के एग्जीक्यूटिव हेड के तौर पर लिएउतनान्त जनरल रैंक के अफसर तो नियुक्त किया जाता है| बीआरओ ऐसे कठिन इलाको पर रोड नेटवर्क को मेन्टेन करता है जहां पर कोई जाने की सोच भी नहीं सकता|

शांतिकाल के दौरान तो ये आर्गेनाईजेशन बॉर्डर एरियाज पर ऑपरेशन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफ जनरल स्टाफ को डेवेलोप और मेन्टेन करने के साथ साथ जो बॉर्डर स्टेट्स हे वहा पे सोशल इकनोमिक डेवलपमेंट में अपना योगदान देती है| जब युद्ध जैसे हालात बनते है तब इसका मुख्य कार्य होता हे LOC और LEC जैसी जगाओ पर रोड नेटवर्क को इस तरीके से मेन्टेन करके रखना ताकि वह पर इंडियन आर्म्ड फोर्सेज आसानी से अपने ऑपरेशन्स कर सके| इन स्थितियों में बीआरओ को मुख्य रूप से सडको पुलो प्लंबो कॉज़वे हेलीपाड़स और एयरफील्ड के निर्माण का कार्य सौंपा जाता है| बीआरओ के पास करीब 18 परियोजना ऐ है जो की अलग अलग टास्क फोर्सेज रोड कंस्ट्रक्शन कम्पनीज, ब्रिज कंस्ट्रक्शन कम्पनीज, ड्रेन मेंटेनेंस कम्पनीज और प्लाटुन की बीच डिवाइड की जाती है| इसके पास बेस वर्कशॉप स्नो डिवीज़न ट्रेनिंग और रिक्वायरमेंट्स सेण्टर जैसी अलग अलग कार्य भी मौजूद है| ये कठिन से कठिन परिस्थियों और ख़राब से ख़राब मौसम के बावजूद भी अपने कर्तव्य पर निरथ रहते हुए ये सिमा सेंटरों पर पुनःडी ढांचे का विकास करते है ताकि इंडियन आर्म्ड फोर्सेज को उनके सामजिक जरूरतों को पूरा करने में मदद हो सके| बीआरओ ने दुर्गम इलाको में पुनः दीढांचे का विकास करके इसने भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है| अपनी इस स्थापना के बाद से लेकर अभी तक बीआरओ पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर कई तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर के अपने महत्व पूर्ण योगदान दे चूका है| अभी हाल ही में भी जोजिला पास के कार्य को अपने निर्धारित समय से पहले पूरा करके इस आर्गेनाईजेशन ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल किया था| और जब 2017 में दोकलां विवाद हुआ था वह पर रोड नेटवर्क इतना अच्छा नहीं था जिस वजह से बेस तक पहुँच ने में करीब 7 घंटे तक का समय लग जाता था लेकिन अब बीआरओ की मदद से वहां पर हर मौसम में काम करने वाले तारको से बने एक सड़क तैयार हो चुकी है जिस पर आप चाहे जितना वजन लेजा सकते हे और उस वजह से जहां 7 घंटे का समय लगता था वह अब केवल 40-45 मिनट का समय लगता है|

बीआरओ देश में फारवर्ड एरिया में 19 एयर फ़ील्ड्स का निर्माण कर चुकी है| हिमाचल प्रदेश में स्थित दुनिया की सबसे कठिन मॉडरेट टनल रोहतांग टनल का निर्माण करने में इसी आर्गेनाईजेशन का हाथ है|

इंडियन आर्म्ड फोर्सेज को सपोर्ट करने के उद्देश्य के साथ शुरू की गयी ये एक बोहोत महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल थी जो की आज में समय में एक बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है|

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